DDL Exam

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अगस्त द्वितीय सप्ताह , महत्वपूर्ण कर्रेंट्स अफेयर्स :-

रक्षा निर्यात को बढ़ाने के लिये नीति ::


हाल ही में रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence- MoD) ने सार्वजनिक प्रतिक्रिया (FeedBack) के लिये रक्षा उत्पादन और निर्यात संवर्द्धन नीति (Defence Production & Export Promotion Policy- DPEPP) 2020 का मसौदा तैयार किया है।

§  DPEPP 2020 को आत्मनिर्भर बनने और निर्यात के लिये देश की रक्षा उत्पादन क्षमताओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिये एक अतिव्यापी मार्गदर्शक दस्तावेज़ के रूप में परिकल्पित किया गया है।

लक्ष्य एवं उद्देश्य: 

§  इसका उद्देश्य वर्ष 2025 तक एयरोस्पेस और रक्षा वस्तुओं तथा सेवाओं के $5 बिलियन के निर्यात सहित 1,75,000 करोड़ रुपए का विनिर्माण कारोबार सुनिश्चित करना है

§  इसके अलावा सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये उत्तम उत्पादों के निर्माण के साथ-साथ एयरोस्पेस और नौसेना के जहाज़ निर्माण उद्योग को शामिल करते हुए एक गतिशील, मज़बूत तथा प्रतिस्पर्द्धी रक्षा उद्योग विकसित करना है।

§  आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू डिज़ाइन तथा विकास के माध्यम से "मेक इन इंडिया" पहल को आगे बढ़ाना।

§  रक्षा उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना और वैश्विक रक्षा मूल्य शृंखलाओं का हिस्सा बनना।

§  एक ऐसे वातावरण का निर्माण करना जो अनुसंधान और विकास तथा नवाचार को प्रोत्साहित करता है एवं एक मज़बूत व आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग को बढ़ावा देता है।


 बंदी प्रत्यक्षीकरण क्या है::


§  बंदी प्रत्यक्षीकरण

o    बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के पास संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत रिट जारी करने का अधिकार होता है।

o    यह उस व्यक्ति के संबंध में न्यायलय द्वारा जारी आदेश होता है, जिसे दूसरे द्वारा हिरासत में रखा गया है। यह किसी व्यक्ति को जबरन हिरासत में रखने के विरुद्ध होता है।

o    बंदी प्रत्यक्षीकरण वह रिट है जिसकी कल्पना एक ऐसे व्यक्ति को त्वरित न्याय प्रदान करने के लिये एक प्रभावी साधन के रूप में की गई थी जिसने बिना किसी कानूनी औचित्य के अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता खो दी है।

o    भारत में बंदी प्रत्यक्षीकरण की रिट जारी करने की शक्ति केवल सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय में निहित है।

o    बंदी प्रत्यक्षीकरण की रिट सार्वजनिक प्राधिकरणों या व्यक्तिगत दोनों के विरुद्ध जारी की जा सकती है।

§  बंदी प्रत्यक्षीकरण का महत्त्व

o    बंदी प्रत्यक्षीकरण का अधिकार किसी व्यक्ति को गैर-कानूनी तरीके से उसके निजी अधिकारों से वंचित करने की सभी स्थितियों में एक उपाय के रूप में उपलब्ध है।

o    यह गैर-कानूनी या अनुचित नज़रबंदी से तत्काल रिहाई के प्रभावी साधनों की पुष्टि करता है।

§  बंदी प्रत्यक्षीकरण कब जारी नहीं की जा सकती है?

o    यदि व्यक्ति को कानूनी प्रक्रिया के अंतर्गत हिरासत में लिया गया हो।

o    यदि कार्यवाही किसी विधानमंडल या न्यायालय की अवमानना के तहत हुई हो।

o    न्यायालय के आदेश द्वारा हिरासत में लिया गया हो।

राम मंदिर में टाइम कैप्सूल ::

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण स्थल पर ज़मीन के नीचे एक ‘टाइम कैप्सूल’ (Time Capsule) या काल पत्र (Kaal Patra) रखे जाने की खबरों को लेकर विभिन्न प्रकार के दावे पेश किये जा रहे हैं। 


प्रमुख बिंदु:

§  यद्यपि ‘राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट’ द्वारा टाइम कैप्सूल रखे जाने की बात का खंडन किया गया है, परंतु ट्रस्ट के कुछ सदस्यों के अनुसार, टाइम कैप्सूल रखा जा रहा है तथा यह भगवान राम और उनके जन्मस्थान के बारे में एक संदेश लेकर जाएगा और इसे हज़ारों वर्षों तक संरक्षित रखा जाएगा। 

टाइम कैप्सूल (Time Capsule):

§  यह किसी भी आकार या आकृति का एक कंटेनर होता है, जिसमें वर्तमान समय के दस्तावेज़, फोटो और कलाकृतियों को रखा जाता है तथा आने वाली पीढ़ियों की खोज के लिये इसे भूमिगत दफन किया जाता है।

§  टाइम कैप्सूल के निर्माण के लिये विशेष इंजीनियरिंग की आवश्यकता होती है ताकि लंबी समयावधि के बाद भी कैप्सूल में रखी गई सामग्री का क्षय न हो।

§  कैप्सूल के निर्माण के लिये एल्यूमीनियम, स्टेनलेस स्टील जैसी सामग्री तथा अम्लता रहित पेपरों का प्रयोग किया जाता है।

वैश्विक स्तर पर टाइम कैप्सूल:

§  यद्यपि ‘टाइम कैप्सूल’ शब्द का प्रयोग 20वीं शताब्दी से प्रयुक्त किया जाने लगा है, परंतु इसका प्रारंभिक उदाहरण वर्ष 1777 का है, जिसे दिसंबर 2017 में पुनर्बहाली कार्य के दौरान स्पेन के एक चर्च से प्राप्त किया गया। 

§  नियोजित 'टाइम कैप्सूल' का प्रारंभ वर्ष 1876 से माना जाता हैजब न्यूयॉर्क पत्रिका के प्रकाशक द्वारा फिलाडेल्फिया में 'सेंचुरी सेफ' (Century Safe) नाम से टाइम कैप्सूल को दफन किया गया।

§   इंटरनेशनल टाइम कैप्सूल सोसाइटी (ITCS); जो दुनिया में 'टाइम कैप्सूल' की संख्या का अनुमान लगाती रहती है, के अनुसार संपूर्ण विश्व में अभी भी 10,000-15,000 'टाइम कैप्सूल' हैं।

 

भारत में टाइम कैप्सूल:

लाल किला:

o    भारत मे टाइम  कैप्सूल के कई प्रमुख उदाहरण देखने को मिलते हैं। एक ‘टाइम  कैप्सूल’ लाल किले के बाहर वर्ष 1972 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा भूमिगत रखा गया था। जिसको लेकर सरकार और अन्य पार्टियों के बीच काफी विरोध-प्रदर्शन देखने को मिला तथा जनता पार्टी की सरकार द्वारा इसे खोदकर निकाल लिया गया।

आईआईटी कानपुर:

o    6 मार्च, 2010 को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा IIT कानपुर के कैंपस में टाइम कैप्सूल दफन किया गया था।

o    इसमें संस्थान का एक हवाई नक्शा, वार्षिक रिपोर्ट, हॉस्टल मेस का मेनू जैसी कुछ सामग्री रखी गई थी।  

अन्य टाइम कैप्सूल:  

o    मुंबई के एक स्कूल, जालंधर में लवली पब्लिक यूनिवर्सिटी, गांधी नगर के महात्मा मंदिर आदि में भी टाइम कैप्सूल दफन किये गए हैं।

टाइम कैप्सूल का महत्त्व:

§  'टाइम कैप्सूल' का उपयोग भविष्य की पीढ़ियों के साथ संचार स्थापित करने की एक विधि के रूप में किया जाता है।

§  'टाइम कैप्सूल' भविष्य के पुरातत्त्वविदों, मानवविज्ञानी, या इतिहासकारों को अतीत की मानव-सभ्यता के बारे में जानकारी प्राप्त करने में मदद करते हैं।

टाइम कैप्सूल की आलोचना:

§  कुछ इतिहासकारों का मानना है कि यह अनिवार्य रूप से एक 'व्यक्तिपरक अभ्यास' है, जिसे वर्तमान में महिमामंडन के रूप में पेश किया जा रहा है।

§  'टाइम कैप्सूल' में पर्याप्त जानकारी का अभाव होता है, कई स्थानों से प्राप्त 'टाइम कैप्सूल' में उस समय के लोगों के बारे में बहुत कम जनकारी प्राप्त हुई है।

निष्कर्ष:

§  'टाइम कैप्सूल' इतिहास को दर्शाने का एक मान्य तरीका नहीं है। टाइम कैप्सूल  में रखे जाने वाले दस्तावेज़ों का प्रमाणन नहीं किया जाता है, अत: टाइम कैप्सूल में प्रदान की जाने वाली जानकारी को अन्य स्रोतों के साथ सत्यापित किया जाना चाहिये।

 

ब्रू शरणार्थी ::

मिज़ोरम से विस्थापित ब्रू समुदाय का प्रतिनिधित्त्व करने वाले तीन संगठनो ने संयुक्त आंदोलन समिति (Joint Movement Committee- JMC) द्वारा त्रिपुरा में ब्रू समुदाय के पुनर्वास के लिये प्रस्तावित स्थलों को  खारिज  कर दिया है। संयुक्त आंदोलन समिति गैर ब्रू समुदाय का प्रतिनिधित्त्व करने वाला एक संगठन है।


ब्रू समुदाय:

§  ब्रू समुदाय भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र का एक जनजातीय समूह है। ऐतिहासिक रूप से यह एक बंजारा समुदाय है तथा इस समुदाय के लोग झूम कृषि (Slash and Burn Farming) से जुड़े रहे हैं।

§  ब्रू समुदाय स्वयं को म्याँमार के शान प्रांत का मूल निवासी मानता है, इस समुदाय के लोग सदियों पहले म्याँमार से आकर भारत के मिज़ोरम राज्य में बस गए थे।

§  ब्रू समुदाय के लोग पूर्वोत्तर के कई राज्यों में रहते हैं परंतु इस समुदाय की सबसे बड़ी आबादी मिज़ोरम के मामित और कोलासिब ज़िलों में पाई जाती है।

§  इस समुदाय के अंतर्गत लगभग 12 उप-जातियाँ शामिल हैं।

§  ब्रू समुदाय के कुछ लोग बांग्लादेश के चटगाँव पहाड़ी क्षेत्र में भी निवास करते हैं।

§  मिज़ोरम में ब्रू समुदाय को अनुसूचित जनजाति के तहत सूचीबद्ध किया गया है, वहीं त्रिपुरा में ब्रू एक अलग जाति समूह है।

§  त्रिपुरा में ब्रू समुदाय को रियांग नाम से जाना जाता है।

§  इस समुदाय के लोग ब्रू भाषा बोलते हैं, वर्तमान में इस भाषा की कोई लिपि नहीं है।

§  पलायन के परिणामस्वरूप समुदाय के कुछ लोग ब्रू भाषा के अतिरिक्त कुछ अन्य राज्यों की भाषाएँ जैसे-बंगाली, असमिया, मिज़ो, हिंदी और अंग्रेज़ी भी बोल लेते हैं।

कश्मीर: भारत और चीन

जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को निरस्त करने के एक वर्ष बाद चीन ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (United Nations Security Council-UNSC) में जम्मू-कश्मीर की स्थिति का मुद्दा उठाया है।


जम्मू-कश्मीर पर चीन का पक्ष

§  हाल ही में चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि ‘चीन कश्मीर क्षेत्र की स्थिति पर बारीकी से नज़र बनाए हुए है और कश्मीर के मुद्दे पर चीन की स्थिति सुसंगत और स्पष्ट है।

§  कश्मीर के मुद्दे पर अपने पक्ष को लेकर चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर चीन हमेशा से तीन बातों पर ज़ोर देता हुआ आया है-

o    पहला यह कि कश्मीर मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच इतिहास का बचा हुआ एक विवाद है।

o    दूसरा यह कि कश्मीर क्षेत्र की यथास्थिति में कोई भी एकतरफा परिवर्तन पूर्ण रूप से अवैध और अमान्य है।

o    तीसरा और अंतिम यह कि कश्मीर क्षेत्र का मुद्दा संबंधित पक्षों के बीच बातचीत और परामर्श के माध्यम से शांतिपूर्वक ढंग से हल होना चाहिये।

भारत ने क्या कहा?

§  चीन द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में कश्मीर के मुद्दे को उठाने के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ‘चीन को इस मामले में हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं है, और इसलिये चीन को अन्य देशों के आंतरिक मामलों में टिप्पणी करने से बचना चाहिये।

§  संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टी. एस. तिरुमूर्ति ने कहा कि ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की हालिया बैठक बंद कमरे में आयोजित पूर्ण रूप से एक अनौपचारिक बैठक थी, जिसका कोई भी रिकॉर्ड संग्रहित नहीं किया गया।’ 

§  भारत ने कई अवसरों पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के समक्ष स्पष्ट किया है कि अनुच्छेद 370 को समाप्त करना भारत का आंतरिक मामला था।

COVID-19 तथा विटामिन-D की कमी ::

हाल ही में शोधकर्त्ताओं द्वारा इस बात का दावा किया गया है कि विटामिन-D की कमी उन COVID-19 संक्रमित लोगों को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रही है जो उच्च जोखिम रोगों (मधुमेह, हृदय रोग, निमोनिया, मोटापा ) तथा धूम्रपान की लत से ग्रसित हैं।



§  इसका संबंध श्वसन पथ (Respiratory Tract) के संक्रमण तथा  फेफड़ों की चोट (Lung Injury) से भी संबंधित है।

§  अलग-अलग स्थान (शहरी या ग्रामीण), उम्र या लिंग के बावजूद भी भारत में एक बड़ी आबादी विटामिन-D की कमी से पीड़ित है।

o    भारत एक उष्णकटिबंधीय देश है जहाँ धूप प्रचुर मात्रा में पहुँचती है तथा शरीर में विटामिन-D के निर्माण को प्रेरित/उत्तेजित करती है।

§  इंडियन जर्नल ऑफ एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज़्म (Indian Journal of Endocrinology and Metabolism) के वर्ष 2017 में प्रकाशित एक विश्लेषण के अनुसार, भारत के विभिन्न राज्यों के लोगों में विटामिन-D का स्तर 3.15 नैनोग्राम/मिलीलीटर से लेकर 52.9 नैनोग्राम/मिलीलीटर तक था, जो कि 30-100 नैनोग्राम/ मिलीलीटर के आवश्यक स्तर से काफी कम था। 

o    दक्षिण भारतीयों में विटामिन-D का स्तर 15.74-19.16 नैनोग्राम/मिलीलीटर के बीच देखा गया। महिलाओं में पुरुषों की तुलना में  लगातार विटामिन-D का निम्न स्तर देखा गया।

§  विटामिन-D की कमी ग्रेट ब्रिटेन में बसे भारतीय उपमहाद्वीप मूल के लोगों में भी पाई जाती है।

o    इससे इस क्षेत्र के लोगों की आनुवांशिकी तथा विटामिन-D के चयापचय के मध्य संबंध का पता चलता है।

§  राष्ट्रीय पोषण निगरानी ब्यूरो (National Nutrition Monitoring Bureau- NNMB) से प्राप्त आँकड़ों के अनुसार, पिछले 50 वर्षों में भारतीय जनसंख्या में कैल्शियम का औसत स्तर  प्रति दिन 700 यूनिट से 300-400 यूनिट तक कम हो गया है।

o    मानव शरीर में प्रति दिन कैल्शियम का  सामान्य आवश्यक स्तर  800-1,000 यूनिट हैविटामिन- D शरीर द्वारा कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है।

o    हड्डियों को मज़बूती प्रदान करने के लिये लिये शरीर को कैल्शियम की आवश्यकता होती है। इसके अलावा मांसपेशियों के संचालन में तथा तंत्रिकाओं द्वारा मस्तिष्क एवं शरीर के प्रत्येक हिस्से के मध्य सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिये भी कैल्शियम की आवश्यकता होती है।

o    यह हार्मोन एवं एंज़ाइमों को स्त्रावित करने में भी मदद करता है जो मानव शरीर में लगभग प्रत्येक कार्य को प्रभावित करते हैं।

o    भारतीयों में कैल्शियम की यह कमी इस तथ्य के विपरीत है कि भारत विश्व में प्रति दिन अधिकतम दूध का उत्पादन करने वाला देश है जो कैल्शियम का एक समृद्ध स्रोत है।

विटामिन-

§  विटामिन-D वसा में घुलनशील विटामिन है, जो प्राकृतिक रूप से बहुत कम खाद्य पदार्थों जैसे- वसायुक्त मछली एवं मछली के यकृत के तेल, सूअर के यकृत, पनीर एवं अंडे की जर्दी में पाया जाता है।

o    इसका स्राव शरीर की कोशिकाओं द्वारा उस समय किया जाता है जब सूर्य के प्रकाश की पराबैंगनी किरणें त्वचा पर पड़ती हैं तथा विटामिन-D के संश्लेषण को प्रेरित/उत्तेजित करती हैं।

o    सूर्य का प्रकाश कोलेस्ट्रॉल-आधारित अणु में एक रासायनिक प्रतिक्रिया को प्रेरित कर इसे यकृत में कैल्सीडियोल (Calcidiol) तथा गुर्दे में कैल्सीट्रियोल (Calcitriol) में परिवर्तित करता है।

o    तकनीकी रूप से 25-OHD (25-Hydroxyvitamin D) कहे जाने वाले ये अणु शारीरिक रूप से सक्रिय होते हैं।

कार्य: 

§  विटामिन D रक्त में कैल्शियम और फॉस्फेट की पर्याप्त मात्रा को बनाए रखने में मदद करता है जो हड्डियों को कमज़ोर होने से रोकते हैं।

§  विटामिन-D के अन्य कार्यों में कोशिका वृद्धि, न्यूरोमस्कुलर, प्रतिरक्षा कार्य एवं सूजन को कम करना शामिल है।

आवश्यक मात्रा:

§  एक स्वास्थ शरीर में 30-100 नैनोग्राम/ मिलीलीटर की सीमा में 25-ओएचडी का स्तर पर्याप्त माना जाता है। 21-29 नैनोग्राम/मिलीलीटर के बीच के स्तर को अपर्याप्त माना जाता है तथा 20 नैनोग्राम/मिलीलीटर से नीचे का स्तर व्यक्ति में विटामिन-D की कमी को दर्शाता है।

प्रभाव:

§  विटामिन-D की कमी से बच्चों में रिकेट्स तथा वयस्कों में ऑस्टियोमलेशिया (हड्डियों का नरम होना) रोग हो जाता है।

§  विटामिन-D की कमी से हड्डियाँ पतली, भंगुर हो जाती है तथा इसमें अस्थिसुषिरता (ऑस्टियोपोरोसिस) की समस्या उप्तन्न हो जाती है।

 

पाकिस्तान का नया मानचित्र ::

हाल ही में पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर, लद्दाख, सर क्रीक और जूनागढ़ को शामिल करते हुए एक नए राजनीतिक मानचित्र का अनावरण किया है।